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बुधवार, 23 सितंबर 2009

ग्रामीण क्षेत्र के तमाम मासूम जी रहे खतरे में

बच्चों की जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण बहुत जरुरी है। शहर कस्बों की अपेक्षा दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी टीकाकरण अभियान गति नहीं पकड़ पा रहा। यदि देखा जाये तो ग्रामीण अंचलों में आज भी कई मासूम जिंदगियां खतरे में जी रही है।
मैनपुरी के बेवर ब्लाक क्षेत्र के अन्तर्गत आज भी ऐसे कई गांव हैं जहां बच्चों का नियमित रूप से टीकाकरण नहीं हो पाता है। जन्म के साथ ही बच्चे को काली खासी, टिटनेस, खसरा, पोलियो बीसीजी, जैसी बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण बहुत जरुरी है। हालांकि शहर कस्बों में टीकाकरण में उतनी लापरवाही नहीं बरती जाती है। जितनी ग्रामीण क्षेत्रों में इसके अलावा ईट भट्टों व फैक्ट्रियों में काम करने वाले अन्य राज्यों के मजदूर परिवारों में बच्चों के टीकाकरण की तरफ कोई ज्यादा पहल नहीं की जाती है। सरकारी स्तर पर टीकाकरण कराने का प्रावधान है। मगर ये आंकड़ों की भेंट चढ़ने लगे हैं। यह बात सभी मानते हैं कि पोलियों उन्मूलन अभियान के साथ ही अन्य टीकाकरण अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया कहीं पर संसाधनों की कमी तो कही पर लापरवाही से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। ब्लाक क्षेत्र के दूरदराज बसे ग्रामों में सरकारी स्वास्थ्य की कोई व्यवस्था न होने के कारण वहां बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हो पाता है। यदि देखा जाये तो अन्य टीकाकरण की अपेक्षा लाखों के वजट वाले पोलियों उन्मूलन अभियान में दिलचस्पी ज्यादा है। दूसरे टीकाकरण की सिर्फ लकीर ही पीटी जाती है। आकड़े कुछ भी बोले मगर हकीकत किसी से छिपी नहीं।
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समझ नहीं आता कैसे कोई इन मासूमो को बीमारियों के खतरे में छोड़ चैन की बंसी बजा सकता है ? क्या केवल कागजो पर खाना पूर्ति ही होती रहेगी या कभी सच में इन बच्चो के लिए कुछ किया जायेगा ?? 
कहाँ है आधिकारी ......कहाँ गए वो नेता ....जो हर १५ अगस्त और २६ जनवरी को इन्ही बच्चो को देश का भविष्य बताते है ??
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खैर साहब, हमे क्या ?? चाहे आप बच्चो का टीकाकरण करवाओ या कागजो का  ............जो मर्जी सो करो !! अपनी तो आदत है सो कहेते है ............जागो सोने वालो .........

2 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक आलेख........
    उपयोगी आलेख.........
    सटीक आलेख.........
    ___इस आलेख के माध्यम से आपने सचेत किया है

    आपका अभिनन्दन !

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  2. कहाँ है आधिकारी ......कहाँ गए वो नेता ....जो हर १५ अगस्त और २६ जनवरी को इन्ही बच्चो को देश का भविष्य बताते है ??

    सवा सोलह आने सच कहा आपने. मुंह से बोलने वाले गलतिया पकड़ में आने पर खींसे ही तो निपोरते पाए जाते हैं.
    अब चुल्लू भर पानी में कोई इन्हें डूबा ही नहीं सकता इनके लिए तो सरे जंहा का भी पानी काम पड़ेगा, डुबोने के लिए.......

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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