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रविवार, 20 फ़रवरी 2011

क्या भारत में केवल नेता की जान कीमती है ??

रिहाई के लिए

मल्कानगिरी के अपहृत डीएम आरवी कृष्णा व इंजीनियर पबित्र मांझी की रिहाई के लिए रविवार, 20 फरवरी को प्रदर्शन करते स्थानीय निवासी।

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कम से कम जनता तो इनके साथ है ... बाकी किसी को इन की फ़िक्र है ऐसा लगता तो नहीं ... बातें बहुत हो रही है ... नतीजा कुछ भी नहीं ... अभी तक एक छोटा सा सुराग तक तो मिला नहीं है ... इंतज़ार हो रहा है ... डैड लाइन आगे बड़ जाए ... कहीं ऐसा न हो ... डैड लाइन के चक्कर में इन बेचारों की लाइफ लाइन डैड न हो जाए !

क्या इन अधिकारियो की जगह कोई नेता होता या ... नेता का पालतू कुत्ता होता ... तो भी इतना समय लिया जाता उचित कारवाही के लिए ??

क्यों इतना समय लिया जा रहा है इन लोगो की रिहाई में ... क्या इन लोगो की जान की कोई कीमत नहीं है सरकार की निगाह में !? 

अगर यही रवैया रहा तो कौन शामिल होना चाहेगा IAS और PCS में ??

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जागो सोने वालों ...