समर्थक

रविवार, 26 सितंबर 2010

सिर्फ़ २ बाते .... आपसे !!

आज आप लोगो से सिर्फ़ दो बाते कहनी है .......वह भी अपनी कही हुयी नहीं है ....निदा फ़ाज़ली साहब ने कही है ..... पर क्या खूब कही  है | अपना काम तो सिर्फ़ आप लोगो का ध्यान इन बातों की तरफ करना है ! आगे आप की मर्ज़ी !


१ )  बच्चा बोला देख कर मज्जिद आलिशान .....
     अल्लाह तेरे एक को इतना बड़ा मकान !
 
और
 
२ ) अन्दर मूरत पर चढ़े ....घी, पुड़ी, मिष्ठान .....
     बाहर खड़ा देवता सब से मांगे दान !

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

हो सके तो ज़रा सोचियेगा इन बातों पर, हो सकता है बहुत से सवालो के जवाब शायद आपको खुद बा खुद मिल जाएँ !
------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
जागो सोने वालो ...

17 टिप्‍पणियां:

  1. शिवम जी,
    आपकी सिर्फ़ दो बातें दो सौ बातों से बड़ी हैं।
    बहुत अच्छी पंक्तियां हैं निदा साहब की।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह वाह सिर्फ़ चार पंक्तियों में ही आपने सब सच सामने रख दिया शिवम भाई ....एकदम झन्नाटेदार सच है ये

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर पोस्ट. सवाल जवाब मिल जाने का नहीं है.समस्या शैतानों से है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. निदा फाज़ली साहब ने खूब कहा है ...यहाँ प्रस्तुत करने के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सही .....तूही राम है टू रहीम है, तेरे नाम अनेक तू एक ही है!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बिल्कुल सही! निदा फ़ाज़ली साहब ने सठिक कहा है! सुन्दर पोस्ट!

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर... दुनियां इसको सही से समझ जाए तो सब बवाल मिट जाए.....

    बहुत सुन्दर पोस्ट.

    उत्तर देंहटाएं
  8. साइड पर आपने एक बढ़िया विजेट लगा रखा है उसे ही यहाँ कोट करना चाहूंगा शिवम् जी " Wake up, Stupids !!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. निदा फाजली साहब से मैं सहमत हूं। काश दुनिया के सारे लोग ऐसा ही सोचने लगें...।

    उत्तर देंहटाएं
  10. फाजली साहब के लाजवाब अशआर..दरअसल सब कुछ इन्सान के समझने पर निर्भर करता है.....

    उत्तर देंहटाएं
  11. बिल्कुल पते की बात शिवम जी। खैर निदा जी तो निदा जी हैं ही एकदम सटीक कहने वाले। आपने भी चुनकर पोस्ट लगाई है।
    यह जानकर अच्छा लगा कि आप मैनपुरी से हैंं मैं भी अपनी नौकरी के ‘ाुरूआती चार साल मैनपुरी में बिता चुका हूं। दादा प्रेचचन्द्र सक्सैना प्राणाधार, जगत प्रकाश चतुर्वेदी, लाखन सिंह भदौरिया सौमित्र जी, विश्वदेव सिंह चैहान सभी का स्नेह प्राप्त हुआ था उन दिनों।

    उत्तर देंहटाएं
  12. निदा जी ने बहुत लाजवाब कहा है ... आपने भी आज के माहौल को देख कर इन दो शेरॉन में कितना कुछ कह दिया है .. वो भी बिना कहे .... बहुत खूब शिवम जी .....

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।