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शुक्रवार, 4 जून 2010

यह कैसा आविष्कार - क्या हम सही रास्ते जा रहे है ?

Posted by at 12:56 am Read our previous post
इंसान ने शुरुआत से ही विज्ञानं को अपना साथी बनाया हुआ है ............उसने अपनी हर जरूरत के मुताबिक अपने इसी साथी की मदद से अपने लिए ऐसी ऐसी खोजे करी कि आज वह अपनी धरती को छोड़ चाँद तक पर बसने के सपने सजा रहा है ! इन सब उपलब्धियों को देखे तो लगता है कि इंसान का सब से वफादार साथी विज्ञान ही है |

पर इंसान तो साहब इंसान ठहरा ............जब तक कुछ गलत ना करें अपनी इंसानियत को कैसे साबित करें |

तो लग गए जनाब विज्ञान का पूरा इस्तमाल करने में कुछ ऐसे अविष्कारों के लिए जो अगर ना भी हुए होते तो काम चल जाता .........................जैसे कि परमाणु बम |
वैसे अभी कुछ दिन पहले एक लेख पढ़ था जिस में इंसान के इस वफादार साथी का एक और कारनामा छपा था| आजतक यही सोच रहा हूँ क्या इस आविष्कार कि सच में कोई जरूरत थी ??

यहाँ उस लेख का लिंक दे रहा हूँ ताकि आप सब भी उसको पढ़े और अपनी राय दे !

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जरूरत है हम सब को इस नींद से जागने की कि हम विज्ञानं का सदुपयोग कर रहे है | कुछ आविष्कार हितकारी नहीं होते यह भी समझना होगा | इंसान एक सामाजिक प्राणी है .........और समाज में बहुत सी ऐसी रीतियाँ है जो पुरानी और बचकानी लग सकती है पर जिन के होने की वजह से ही समाज में एक स्थिरता है | यह स्थिरता बनी रहे उस में ही हम सब की भलाई है !
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वैसे हम को क्या पर क्या करें आदत जो है सो कह रहे है .............................जागो सोने वालों ......

6 टिप्‍पणियां:

  1. मैं चिंतित हूँ , अगर सही रास्ते पर जा रहे होते तो आज जो ढेरों मुसीबते जो प्रत्यक्ष तौर पर साफ़-साफ़ दीख रही है जिन्दगी में वो क्यों आती ?

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  2. कहाँ तो विज्ञान का उपयोग मानवता की भलाई, उसके उत्थान हेतु होना चाहिए था....लेकिन आने वाले वक्त में यही विज्ञान शायद मानवता का सबसे बडा शत्रु सिद्ध होने वाला है.

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  3. आज ही टी.वी. में न्यूज़ देखा... कि अब इन्सान के शरीर को मरने के बाद 500 saalon tak फ्रीज़ किया जा सकता है.... और उसे आने वाले दिनों में .... ज़िंदा भी किया जा सकेगा....

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  4. आईये जानें .... मैं कौन हूं!

    आचार्य जी

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आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

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