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सोमवार, 1 जून 2015

कैप्टन सौरभ कालिया को मिले न्याय

करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान की हिरासत में बेरहमी से मारे गए कैप्टन सौरभ कालिया की मौत की अंतर्राष्ट्रीय जांच से एनडीए सरकार ने इनकार किया है। सरकार ने संसद में इसकी जानकारी एक प्रश्न के जवाब में दी थी जिसके बाद से यह मामला तूल पकड़ने लगा है।

सरकार ने कहा था कि पड़ोसियों के साथ रिश्तों को ध्यान में रखते हुए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जाना कानूनी रूप से वैध नहीं होगा। 16 साल बाद भी एनडीए सरकार पाकिस्तान के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में अपील करने को लेकर गंभीर नहीं है। सरकार संसद में कह चुकी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाना मुमकिन नहीं है।

मोदी सरकार ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत में मामले को ले जाना व्यावहारिक नहीं है। वर्ष 1999 में शहीद कालिया के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर ऐसी मांग की थी। तब विपक्ष में रही बीजेपी सरकार ने यूपीए सरकार के ऐसे ही फैसले पर उसे जमकर घेरा था। कैप्टन सौरभ कालिया और उनके साथियों को करगिल युद्ध के दौरान 1999 में पाकिस्तान सेना ने तब बंधक बना लिया था जब वो लोग रूटीन प्रेट्रोलिंग पर निकले हुये थे और बाद मे यातनाएं देकर मार डाला था। 

दूसरी ओर पाकिस्तान ने दावा किया था कि कैप्टन सौरभ का शव एक गड्ढे में मिला था और उनकी मौत सख्त मौसम की वजह से हुई। पर कैप्टन सौरभ और उन के साथियों के क्षत विक्षत शव एक और ही दास्तान कहते है जो उनकी निर्मम हत्या होने की पुष्टि करती है |

गौरतलब है कि कैप्टन सौरभ के पिता एनके कालिया 16 साल बाद भी अपने बेटे के लिए न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। एनके कालिया ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनकी मांग है कि विदेश मंत्रालय इस मसले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में उठाए ताकि जिन पाकिस्तानी जवानों ने उनके बेटे की हत्या की उनके खिलाफ कार्रवाई हो सके। उनके मुताबिक युद्ध के दौरान इस प्रकार का बर्ताव युद्ध बंदियों के साथ जेनेवा समझौते का उल्लंघन है।
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जिस पड़ोसी मुल्क ने आप के सैनिकों को इतनी बेरहमी से मारा हो आप उसके साथ "अच्छे संबंध" रखने के इच्छुक है ...विश्वास नहीं होता ... क्या होगा इन अच्छे संबन्धों से ... सीमा पार आतंकवाद का जो खेल इतने वर्षों से वो खेल रहा है क्या वो रुकेगा ... जिस ने कभी आप का कहीं किसी रूप मे साथ न दिया हो आप उस से उम्मीद रखते हो कि आप का साथ देगा ... वो भी अपने देश के नागरिकों और सैनिकों की जान दांव पर लगा कर| अब भी समय है मित्र और शत्रु का फर्क कीजिये नहीं तो न जाने कितने कैप्टन सौरभ कालिया यूं ही मारे जाएंगे|
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस मे इस मामले को उठा कर एक जिम्मेदार सरकार होने का अपना फर्ज़ पूरा कीजिये और कैप्टन सौरभ कालिया को न्याय दिलवाइए |
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जागो सोने वालों ...

8 टिप्‍पणियां:

  1. यह सरकारी उदासीनता चिंतित और हतोत्‍साहित करती है, पर पाकिस्‍तान के संबंधों को लेकर सरकार तो (नहीं) के बिंदु पर ही टिकी हुई है।

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    1. पर इस से सेना का मनोबल कितना कम होता है यह भी तो इनको सोचना ही होगा |

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  2. मतलब अपनी टोपी बचाने से होता है
    ये होता है कुर्सी पर बैठा या वो होता है ।

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, देश का सच्चा नागरिक ... शराबी - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. शुक्र है सरकार ने जल्दी ही अपनी गलती सुधार ली ... पर मानसिकता का तो पता चल ही गया सरकार का ...

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  5. सरकार को कैप्टन कालिया से जुड़े मुद्दे की गंभीरता समझनी चाहिए। सार्थक ब्लॉगिंग शिवम् भईया। सादर।।

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  6. इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस मे इस मामले को उठा कर एक जिम्मेदार सरकार होने का अपना फर्ज़ पूरा कीजिये और कैप्टन सौरभ कालिया को न्याय दिलवाइए....

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