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सोमवार, 13 दिसंबर 2010

इस हमले से कैसे बचें ??


आज १३ दिसम्बर है ... ९ साल पहले आज के ही दिन कुछ लोगो ने भारत के लोकतंत्र के प्रतीक संसद भवन की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी थी !


 ९ साल बाद ... आज यह भारत के लोकतंत्र का प्रतीक संसद फिर हमले का शिकार है ... पर अब की बार अपने ही सदस्यों के हाथो !!!
 
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जागो सोने वालों ...

15 टिप्‍पणियां:

  1. ये तो पक्ष और विपक्ष ने अपनी नाक की जंग समझ ली है..कोई झुकने को तैयार नहीं है...

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  2. आपके ब्लॉग का नाम एकदम सही है "जागो सोने वाले"
    भला किसीको याद ही कहाँ थे ये जांबाज जिन्होंने अपने प्राणों कि आहुति दे दी..

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  3. चित्रों के माध्यम से बहुत बड़ी बात कह दी....

    http://veenakesur.blogspot.com/

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  4. यह दुर्भाग्यशाली दिन यह भी याद दिलाता है कि हम आज तक फैसला नहीं कर पाए।

    शहीदों को नमन।

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  5. शिवम् साहब किसे जगा रहे है ये अब गहरी नीद में है. कोई क्रांति ही इन्हें जगा सकती है. शायद दुनिया में ऐसा मच्छी बाज़ार ना मिले. बहुत ही विचारणीय पोस्ट......

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  6. शिवम् साहब किसे जगा रहे है ये अब गहरी नीद में है. कोई क्रांति ही इन्हें जगा सकती है. शायद दुनिया में ऐसा मच्छी बाज़ार ना मिले. बहुत ही विचारणीय पोस्ट......

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  7. ये देश का दुर्भाग्य है ... इन नेतान की लिए जो मर गए उनकी भी शर्म नहीं है इन्हें ..

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  8. शिवम भाई, कम शब्‍दों में बडी बात कह दी है आपने। आपकी इस सोच को सलाम करने को जी चाहता है।

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    दिल्‍ली के दिलवाले ब्‍लॉगर।

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  9. वाकई शिवम भाई, बेहद अफ़सोस जनक है...

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  10. कम शब्‍दों में बडी बात...विचारणीय प्रस्तुति...

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  11. आपकी पोस्ट ने यादों के ज़ख्मों को ताज़ा कर दिया !
    आपने सही लिखा है, आज संसद की गरिमा जिस तरह नीलाम की जा रही है सर शर्म से झुक जाता है !
    नव वर्ष की असीम अनंत शुभकामनाएं!
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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