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गुरुवार, 31 जनवरी 2013

मिलिये छोटू से ...

Posted by at 7:05 pm Read our previous post
मिलिये छोटू से ...

इस की इस मुस्कान पर मत जाइए साहब ... बेहद शातिर चीज़ है यह ... "देखन मे छोटो , घाव करे गंभीर" टाइप ... इस से बचना नामुमकीन है !

आप कितनी भी कोशिश कर लीजिये ... इस से आप नहीं बच सकते ... दावा है मेरा !!

गली के नुक्कड़ की चाय की दुकान हो या हाइवे का ढ़ाबा यह छोटू आप को हर जगह मिल जाता है आप चाहे या न चाहे ... और तो और कभी कभी तो आपके घर तक आ जाता है जैन साहब की दुकान से आप के महीने के राशन की 'फ्री होम डिलिवरी' करने ... कैसे बचेंगे आप और हम इस से ... कभी सोचा है !!??

ज़रा सोचिएगा ... समय मिले तो ... वैसे जरूरी नहीं है !
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जागो सोने वालों ...

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत जरूरी और अहम मुद्दा है शिवम भाई , जिस देश का बचपन यूं मुस्कुराने को विवश हो उस देश की जवानी फ़िर रोती ही मिलती है और बुढापा सिसकता हुआ । साठ साल में ये देश न तो अपना बचपन सुधार पाया , न यौवन और न ही साठे के बाद अब बुढापा । अफ़सोस और दुखदाई

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  2. आपने मेरी कहानी पढ़ी थी - 'सपनों का सौदागर', उसी की एक पंक्ति है - 'बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है और आज मैंने उसी भविष्य को हाथ में कटोरा लिए देखा |', इससे ज्यादा दुखदायी और शर्मनाक क्या होगा |

    सादर

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  3. अरे हाँ! यही छोटू था... यहाँ -
    http://archanachaoji.blogspot.in/2009/03/blog-post_24.html

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  4. बहुत सुन्दर तरीके से बिचारो को व्यक्त किया है.

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  5. बाल श्रम, आप और हम - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  6. पता नहीं क्या कहूँ.बाल श्रम के गंभीर समस्या है परन्तु इसके पीछे और अनगिनत समस्याएं हैं. और उन समस्याओं की जड़े भी न जाने कहाँ तक फैली दिखती हैं.
    कभी कभी लगता है यह समस्या बहुत ही आसानी से खतम नहीं तो कम तो की ही जा सकती है अगर थोडा सा प्रेक्टिकल होकर सोचा जाये तो.परन्तु जब करने निकलो तो उसकी तह में इतना कुछ जटिल होता है कि....
    दुखद है बेहद दुखद. देश, समाज के भविष्य की ये हालत.

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  7. १०० फीसदी सही और सटीक बात कही आपने | गंभीरता पूर्वक सोचने योग्य मुद्दा है ये | बाल मजदूरी अपराध है और एक अभिश्राप है | पर इस अपराध को हम सभी अनदेखा करते हैं सिर्फ अपनी सहूलियत के लिए | आपने इस मुद्दे को उठाया इसके लिए आपकी प्रशंसा करना चाहूँगा | अपनी तरह से जो भी कोशिश हो पायेगी उसके लिए मैं तत्पर हूँ | मैं हर तरह से इस विषय पर आपका समर्थन करता हूँ | आभार

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  8. अगर पढ़ लिख जाता तो शायद इसकी स्थिति कुछ और होती .....!!

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  9. शुक्र है,मुस्कान फिर भी बनी हुई है।

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  10. ब्लॉग बुलेटिन की ५५० वीं बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन की 550 वीं पोस्ट = कमाल है न मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

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