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गुरुवार, 12 जनवरी 2017

१०० वीं पोस्ट - स्वामी विवेकानन्द जी की १५४ वीं जयंती

Posted by at 1:17 pm Read our previous post
"सभी मरेंगे- साधु या असाधु, धनी या दरिद्र- सभी मरेंगे। चिर काल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा। अतएव उठो, जागो और संपूर्ण रूप से निष्कपट हो जाओ।
 
भारत में घोर कपट समा गया है। चाहिए चरित्र, चाहिए इस तरह की दृढ़ता और चरित्र का बल, जिससे मनुष्य आजीवन दृढ़व्रत बन सके।"
- स्वामी विवेकानन्द

 
स्वामी विवेकानन्द जी की १५४ वीं जयंती के अवसर पर उनको शत शत नमन |
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जागों सोने वालों ... 

3 टिप्‍पणियां:

  1. 100वी पोस्ट की बधाई ।नमन स्वामी विवेकानन्द जी को । उनके नाम के साथ प्रोपेगेंडा करने के साथ साथ काश हम उनकी कही बातों पर भी अमल कर पाते अपने जीवन मूल्यों में ।

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  2. स्वामी विवेकानन्द जयंती के अवसर पर शत शत नमन!

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