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गुरुवार, 4 नवंबर 2010

त्योहारी बाजार और लुभावनी स्कीमों का सच

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त्योहारी बाजार सज चुका है। स्कीमों की हर तरफ से बौछार हो रही है। हो भी क्यों न, कई सालों के बाद यह साल कारोबारियों को ऐसा नजर आ रहा है, जिसमें उन्हें खूब मुनाफा होता दिख रहा है। इसकी वजहें कई हैं। अर्थव्यवस्था अब मंदी की मार से उबर चुकी है। शेयर बाजार आसमान की तरफ कुलांचे भर रहा है।

कई सालों बाद वर्ष 2010 ऐसा साल आया है, जब मानसून की भरपूर मेहरबानी हुई है। देश के सभी बांध पानी से लबालब हैं। खरीफ की फसल में तमाम नुकसान के बावजूद इस साल पिछले कई सालों के मुकाबले इजाफा हुआ है और रबी की बुआई का रकबा पांच से सात फीसदी तक बढ़ गया है।

प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार डा. सी रंगराजन ने अनुमान व्यक्त किया है कि इस साल रबी की फसल में भारी इजाफे से कृषि के क्षेत्र में विकास की दर 4.5 फीसदी के आसपास रहेगी।

ये तमाम अनुकूल स्थितियां हैं, जिनकी वजह से इस बार त्योहारी बाजार में पिछले कुछ सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा रौनक दिख रही है। 2009 औैर इसके पहले 2008 में भी हालांकि हमारी अर्थव्यवस्था की विकास दर छह फीसदी से ऊपर थी, लेकिन पूरी दुनिया में मंदी छाई होने के कारण त्योहारी बाजार में आशंकाओं के बादल मंडरा रहे थे, जिनसे इनकी रंगत फीकी रही, लेकिन अब हिंदुस्तान में तो कारपोरेट सेक्टर से खुशखबरियां आ रही हैं, दुनियावी अर्थव्यवस्था में भी धीरे-धीरे रंग दिखने लगे हैं।

यही कारण है कि इस बार त्योहारी बाजार नवरात्रों से कुछ पहले ही सज गया था और इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय तक पूरे शबाब में आ चुका था। शायद बाजार की नब्ज और ग्राहकों के मूड में दिख रहे सकारात्मक भावों का ही यह असर है कि इस साल त्योहारी बाजार ढेर सारे ऑफर लेकर आया है, जिससे ग्राहक खूब उत्साहित हैं और अपनी खरीददारी की सूची को या तो अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं या दे चुके हैं।

एलजी, सैमसंग, पैनासोनिक, फिलिप्स। लगभग हर कंपनी इस त्योहारी बाजार के लिए कोई न कोई धमाका ऑफर लेकर आई है। सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां ही नहीं, दूसरे उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियां भी ग्राहकों को लुभाने के लिए कई शानदार ऑफर लेकर आई हैं। यहां तक कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में रीयल मार्केट में डेवलपर्स फ्लैटों की कीमत में विशेष त्योहारी खरीददारी छूट देते हुए दो लाख से 15-16 लाख तक की छूट दे रहे हैं।

कई कंपनियां 'पुराना लाओ, नया ले जाओ' जैसी स्कीमों के तहत गिफ्ट और डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं, जिससे बाजार में इस बार पिछली बार के मुकाबले 25 से 30 फीसदी ज्यादा बिक्री होने का अनुमान है। दिल्ली के कई शोरूम में विजिट के बाद यह देखने को मिला कि लोगों को पुराने के बदले नए ले जाने की स्कीम काफी लुभा रही है।

दरअसल, ग्राहक आमतौर पर दीवाली जैसे त्योहार के मौके पर घर की साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि वह चाहता है कि घर की पुरानी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसें भी नई हो जाएं। इस कारण पुराने के बदले में नया ले जाने का प्रस्ताव ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रहा है।

बाजार के सेंटीमेंट अच्छे देखकर उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों ने इस बार समय से काफी पहले ही बाजार को गुलजार कर दिया है। उन्हें लगता है कि उपभोक्ताओं के पास इस साल खरीददारी के लिए इतने पैसे हैं कि वे उनकी उम्मीदों पर हर हाल में खरे उतरेंगे।

यही कारण है कि आश्वस्त बाजार अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए घडि़यां, डीवीडी प्लेयर, जूसर मिक्सर, वाटर प्योरीफायर से लेकर नकद और कैश बैक तक के ऑफर दे रहा है। पैनासोनिक इस त्योहारी शॉपिंग में ग्राहकों को 7,900 रुपये तक के गिफ्ट दे रही है तो कई दूसरी कंपनियों ने तोहफों की धनराशि 10,000 रुपये तक कर दी है, लेकिन यह भी सही है कि इतना बड़ा तोहफा पाने के लिए उसी अनुपात की खरीददारी भी करनी होगी।

एलजी ने इस बार ग्राहकों को 80 करोड़ रुपये तक के तोहफों को देने का मन बनाया है, क्योंकि उसकी बिक्री का अनुमान 4000 करोड़ रुपये से ऊपर का है। सिर्फ एलजी ही नहीं, सभी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों और दूसरे टिकाऊ उपभोक्ता सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भरोसा है कि इस बार वह पिछले साल के मुकाबले 30 से 45 फीसदी तक की ज्यादा बिक्री करेंगी। हमेशा की तरह टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, म्यूजिक सिस्टम और ऑटोमोबाइल्स जैसे उपभोक्ता सामानों की बिक्री के इस साल भी ज्यादा रहने की उम्मीद है।

कुछ सालों पहले सीआईआई ने एक अध्ययन अनुमान से बताया था कि दीपावली के आसपास त्योहारी मौसम में भारतीय उपभोक्ता बाजार 40 से 50 हजार करोड़ की बिक्री कर लेता है, जो साल दर साल 15 से 20 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। मतलब यह कि अब इसके बढ़कर 55 से 60 हजार करोड़ रुपये हो होने की उम्मीद है।

जिस तरह से पिछले एक दशक से अर्थव्यवस्था में एक निरंतर वृद्धि जारी है, उसी तरह से पिछले एक दशक में उपभोक्ता बाजार में बिक्री का ग्राफ भी 15 से 20 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा है और उपभोक्ताओं की क्रयशक्ति में 25 से 30 फीसदी का उछाल आया है। लब्बोलुआब यह कि बढ़ी हुई बिक्री के बावजूद उपभोक्ता अभी भी ठोस बने हुए हैं।

हाल के सालों में टीवी, फ्रिज, एयरकंडीशनर, वैक्यूम क्लीनर, वाटर प्यूरोफायर, माइक्रोओवन, कंप्यूटर, होम थिएटर, लैपटॉप तथा ऑटोमोबाइल्स विशेषकर कारें और दुपहिया वाहन फेस्टिव सीजन में खरीददारों की खास पसंद बने हुए हैं। इन उत्पादों की बिक्री बाजार में होने वाले कुल कारोबार में 60 से 65 फीसदी तक की हिस्सेदारी रखती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले एक दशक से इन उत्पादों का बाजार बिक्री के मामले में शीर्ष स्थान हासिल किए हुए है और अगले कई सालों तक बिक्री के लिहाज से शीर्ष में इन्हीं उत्पादों का कब्जा रहेगा।

यों तो हर कोई जानता है कि लुभावनी स्कीमों के पीछे ग्राहकों का भला नहीं, कंपनियों का अपना फायदा छिपा होता है। उनकी स्कीमें एक तरह से लुभावना जाल होती हैं, जो ग्राहकों को न सिर्फ खरीददारी के लिए फांसती हैं, बल्कि जरूरत न होने पर भी बाजार ग्राहकों का कुछ इस तरह से माइंड वॉश करता है कि माहौल के सुरूर में ही उपभोक्ता तमाम गैर जरूरी खरीददारी कर लेता है।

इस तरह देखा जाए तो स्कीमें ग्राहक को फांसने, उन्हें येन-केन प्रकारेण उत्पादों को बेचने का जरिया होती हैं। यही इनका एक मात्र मकसद भी होता है। बावजूद इसके आधुनिक अर्थशास्त्र में ऐसी स्कीमों की बिक्री की बढ़ोतरी में जबरदस्त हाथ होता है। इसलिए अगर त्योहारी बाजार में स्कीमों की बौछार हो रही हो तो इसके मकसद साफ हैं, ग्राहक को हर हाल में शिकार बनाना है।

खरीददारों का नया सलाहकार बन गया है इंटरनेट

इंटरनेट के जितने भी उपयोग दिखने में आएं, उतने कम हैं। दरअसल, इंटरनेट अब लगभग हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है और हर किसी की जरूरत का जरूरी हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि त्योहारी खरीददारी में भी इंटरनेट की हाल के सालों में जबरदस्त भूमिका उभरकर सामने आई है।

इंटरनेट आज त्योहारी खरीददारों का ही नहीं, बल्कि हर मौसम और माहौल के खरीददारों का अच्छा खासा सलाहकार बन चुका है। फिर चाहे ऐसे खरीददार किसी भी उम्र समूह के हों। हां, यह बात जरूर है कि इंटरनेट के सबसे ज्यादा दीवाने और उस पर आंख मूंदकर भरोसा करने वाले युवा हैं। आज की तारीख में युवा जो कुछ भी खरीदते हैं, पहले उस उत्पाद को इंटरनेट में सर्च करते हैं और फिर ऑनलाइन ही बाजार में मौजूद वैसे ही तमाम उत्पादों की जांच-परख करते हैं। जो उत्पाद ज्यादा किफायती और ज्यादा बेहतर लगता है, उसे खरीदते हैं यानी अब युवा उपभोक्ताओं के खरीददारी की मन: स्थिति को तय करने में इंटरनेट की काफी बड़ी भूमिका है।

यही कारण है कि आज कंपनियां न सिर्फ इंटरनेट में ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन देने लगी हैं, बल्कि सभी कंपनियां खुद की वेबसाइटें प्राथमिकता के स्तर पर बनाती हैं ताकि इस वजह से उनकी बिक्री में किसी तरह की कमी न होने पाए। इंटरनेट ने जहां एक तरफ ग्राहकों के लिए एक जैसी विभिन्न उत्पादों की जांच-परख का मौका मुहैया कराया है, वहीं दूसरी तरफ वह उन्हें दुनिया के बाजारों तक भी ले गया है, जिससे ग्राहकों का भी फायदा हुआ है और उत्पादन जगत का भी। यही कारण है कि इंटरनेट की दोनों ही क्षेत्रों से खूब निभ रही है।

त्योहारी बाजार का मक्का क्यों बनी है दीवाली

आमतौर पर देखने में आता है कि जो लोग शॉपिंग में जरा भी रुचि नहीं रखते, दीवाली आते ही उन्हें भी शॉपिंगमेनिया घेर लेता है। अपने आगोश में ले लेता है। दरअसल, देश में तकरीबन दो करोड़ लोग संगठित क्षेत्र में नौकरी करते हैं और इस समय सात से नौ लाख तक लोग विभिन्न तरह की बहुराष्ट्रीय कंपनियों, निगमों आदि में काम करते हैं। इसके अलावा देश के छह से सात करोड़ लोग निजी क्षेत्र में काम करते हैं। इन सब लोगों को आमतौर पर वेतन वृद्धि का बकाया और बोनस दीवाली के मौके पर ही दिया जाता है।

देश का अधिकृत वित्तीय वर्ष भले अप्रैल माह से शुरू होता हो, लेकिन पारंपरिक वित्तीय वर्ष दीवाली से ही शुरू होता है। कुल मिलाकर देश का जॉब सेक्टर दीवाली के आसपास बाजार में खरीददारी के लिए उपभोक्ताओं के पास 90,000 से 1,00,000 करोड़ रुपये तक की नकदी मुहैया कराता है। इतने बड़े पैमाने पर बाजार में आने वाली यह नकदी बाजार का कायाकल्प कर देती है। तभी तो कई दुकानदार पूरे साल दीवाली के इंतजार में बिताते हैं। दीवाली के आसपास बाजार का न सिर्फ मुनाफा 20 से 40 फीसदी तक बढ़ जाता है, बल्कि बाजार की फ्रीक्वेंसी और बिक्री का वैल्यूम 400 से 600 फीसदी तक बढ़ जाता है। मीडिया और दूसरे संचार क्षेत्र वर्षा ऋतु जाते ही और त्योहारी मौसम के आहट देते ही इस किस्म का माहौल रच देते हैं कि उपभोक्ताओं में खरीददारी का एक जुनून पैदा हो जाता है।

नवरात्र के पहले ही उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली कंपनियां अपने आकर्षक विज्ञापनों से बाजार को भर देती हैं। जिससे लोगों में उन उत्पादों की जरूरत न होने पर भी उनके खरीदने की लालसा कुलांचे भरने लगती है।

आलेख :- वीना सुखीजा

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अब यह आप को सोचना है कि आप बाज़ार की इस चाल में बाकी सब की तरह ही भेड़ चाल चलने वाले है या सच में एक जागरूक ग्राहक की तरह सिर्फ़ वही चीज़ बाज़ार से लेने जायेगे जिस की आपको सच में जरूरत है !

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जागो सोने वालो...

7 टिप्‍पणियां:

  1. शिवम जी, आपको और आपके परिवार को भी दीपावली की बहुत सारी शुभकामनायें .... खूब मिठाई खाइए और दिए सजाइए ...
    और हाँ ... बीवी को लेकर मार्केटिंग करने निकलेंगे तो अपने ज़मीर को जगाने कि कोशिश भी मत करियेगा ... आँखें बंद करके खर्चा करना पड़ता है भैया ...

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  2. दीपावली के इस पावन पर्व पर आप सभी को सहृदय ढेर सारी शुभकामनाएं

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  3. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये . त्योहार के बहाने खरीददारी हो ही जाती है

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  4. ये ऑफ़र कौन सा अपने बाप की जेब से देते हैं,गला तो ग्राहक का ही काटते हैं। सामान पर अधिकतम मुल्य लिखा होता है। उसमें सब जोड़ लिया जाता है। एक बार मैं गैस चुल्हा लेने गया उस पर 1700 रुपये प्रिंट था और 270 रुपए में लेकर आया। अब बताओ उसके साथ अगर एक और चुल्हा भी फ़ी कर देता तो फ़िर भी 1160 रुपए कमाई होती।

    उपभोक्ता को चारों तरफ़ से लूटा जा रहा है। उसकी जेब पर दिन दहाड़े डाका डाला जा रहा है।

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

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  5. .

    आपने तो पूरा बाजार घुमा दिया.---मंहगाई डायन खाए जात है !

    .

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  6. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम

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  7. दीपावली के इस शुभ बेला में माता महालक्ष्मी आप पर कृपा करें और आपके सुख-समृद्धि-धन-धान्य-मान-सम्मान में वृद्धि प्रदान करें!

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आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

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