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रविवार, 12 जनवरी 2014

स्वामी विवेकानन्द जी की १५० वीं जयंती

Posted by at 2:02 pm
"सभी मरेंगे- साधु या असाधु, धनी या दरिद्र- सभी मरेंगे। चिर काल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा। अतएव उठो, जागो और संपूर्ण रूप से निष्कपट हो जाओ।
भारत में घोर कपट समा गया है। चाहिए चरित्र, चाहिए इस तरह की दृढ़ता और चरित्र का बल, जिससे मनुष्य आजीवन दृढ़व्रत बन सके।"
- स्वामी विवेकानन्द
स्वामी विवेकानन्द जी की १५० वीं जयंती के अवसर पर उनको शत शत नमन |
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