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शनिवार, 23 नवंबर 2013

समाज मे कीचड़ या कीचड़ मे समाज

Posted by at 12:03 pm Read our previous post
आज कल समाज मे ऐसे ही लोगो की भीड़ दिखती है ... जिन की असली जगह हमारा समाज नहीं ... वही कीचड़ है जहां से वो सब आए है | और सब से बड़ी दिक्कत यह है कि ऐसे लोग किसी वर्ग विशेष मे नहीं मिलते बल्कि समाज के हर वर्ग मे पाये जा रहे है ... हाल की घटनाएँ इस का प्रमाण है |

 
अगर जल्द ही इन का कोई ठोस इलाज़ न निकाला गया तो इस समाज को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता |
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जागो सोने वालों ...

1 टिप्पणी:

  1. बिलकुल सही सोचा है , लेकिन इस पूरे समाज में ऐसे ही वर्ग की बहुतायत हो चुकी है फिर उनको चिन्हित करेंगे तो शेष लोग दिखाई ही नहीं देंगे या कहो चिन्हित करने वालों को जीने नहीं देंगे। शुरू करनी होगी एक मुहिम कि ऐसे लोगों पहचान कर उनको बहिष्कृत किया जाय। दो चार लोगों की स्वस्थ सोच कल समाज में एक क्रांति ला सकती है।

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