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गुरुवार, 24 मई 2012

संप्रग-2 की तीसरी सालगिरह का रिटर्न गिफ्ट - स्वीकार करें

Posted by at 12:28 pm
कार्टून साभार श्री सुधीर तैलंग 
संप्रग-2 की तीसरी सालगिरह मनाने और कड़े फैसले लेने का ऐलान करने के अगले ही दिन केंद्र सरकार ने आम जनता को अभूतपूर्व पेट्रोल मूल्य वृद्धि का अनचाहा तोहफा दे डाला। तेल कंपनियों ने बुधवार आधी रात से पेट्रोल की खुदरा कीमत में 7.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करने का ऐलान किया है। सरकार के फैसले से विपक्ष ही नहीं सरकार के घटक दल भी गुस्से में हैं। हालांकि देश के इतिहास में इस एकमुश्त सबसे बड़ी मूल्य वृद्धि में सरकार ने इसकी गुंजाइश भी रखी है कि दबाव बढ़ने पर कुछ कमी की जा सके। पिछले तीन साल में पेट्रोल कीमतें 39.51 रुपये बढ़ा चुकी हैं।
ताजा बढ़ोत्तरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत 73.18 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। आशंका है कि जल्द ही आम आदमी पर डीजल व रसोई गैस की कीमत वृद्धि की भी मार पड़ेगी। इस हफ्ते ही अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह [ईजीओएम] की बैठक में इस बारे में फैसला हो सकता है। पेट्रोल कीमतों में यह बढ़ोत्तरी रुपये में तेज गिरावट का असर मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतें हाल में घटी हैं, लेकिन रुपये की कमजोरी ने नुकसान घटाने के बजाय बढ़ा दिया है। पिछले एक वर्ष [15 मई, 2011 के बाद] के दौरान पेट्रोल 9.77 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।
संसद के बजट सत्र और तीन वर्ष के कार्यकाल के समारोह के बाद सरकार ने पूरे राजनीतिक नफा-नुकसान का आकलन करने के बाद तेल कंपनियों को कीमत वृद्धि की इजाजत दी है। सरकार ने जून, 2010 में तेल कंपनियों को पेट्रोल की कीमत तय करने की आजादी दी थी। इस ंवर्ष की शुरुआत में तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार के दबाव में तेल कंपनियों को कीमत घटानी पड़ी थी। नवंबर, 2011 में जब पेट्रोल महंगा किया गया था, तब ममता बनर्जी ने सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी भी दी थी। इसके बाद बजट पास होने की मजबूरी से पेट्रोल महंगा नहीं किया गया।
तेल कंपनियों की है 6.28 रुपये वृद्धि
तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में 6.28 रुपये की वृद्धि की है। केंद्र व राज्यों की तरफ से टैक्स लगने की वजह से आम जनता को 7.50 रुपये से 8.25 रुपये का बोझ उठाना पड़ेगा। विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पर 15 फीसदी से 33 फीसदी बिक्री कर या वैट वसूला जाता है। तेल कंपनियों ने कहा है कि नवंबर, 2011 के बाद से क्रूड की कीमत में 14 फीसदी वृद्धि होने से उन्हें कीमत बढ़ानी पड़ रही है। इस दौरान डॉलर भी मजबूत हुआ है। इससे क्रूड का आयात महंगा हुआ है। तेल कंपनियों ने कहा है कि उन्हें अपने घाटे की भरपाई के लिए अभी 1.50 रुपये की वृद्धि और करनी पड़ेगी।
(साभार - दैनिक जागरण)

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मुझे कोई तो समझा दो भाई ... काहे इतना बवाल मचा हुआ है ... अरे कोई पहली बार थोड़े ही न बढ़े है दाम पेट्रोल के ... अब तक नहीं समझे आप लोग यह खेल ... अब एक दो दिन मे 'राजमाता' जनहित मे तेल मंत्री की क्लास लेंगी और 5 रुपया कम हो जाएगा दाम पेट्रोल का ... मतलब यह कि जनता को च पर उ की मात्रा मानते हुये यह सब खेल रचा जा रहा है ... सिर्फ 'राजमाता' का जनप्रेम दिखाने के लिए ! तो बवाल न मचाओ ... राष्ट्रहित मे सिर्फ इस 'प्रेम' मे डूब जाओ ... और वैसे भी यह तो बर्थडे पार्टी का  रिटर्न गिफ्ट है यार ... दान में मिली हुई बछिया के दांत कहाँ गिने जाते है महाराज !
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 तेल की धार तो हम सब देख ही रहे है ... यह सरकार अब जनता की धार देखेगी ... बस थोड़ा सा इंतज़ार करो !
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जागो सोने वालों ...

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