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मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

एक अपील :- सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं ... ये सूरत बदलनी चाहिए

Posted by at 3:02 pm Read our previous post
 एक अपील 



अन्ना हजारे जी की इस पवित्र सामूहिक महा अभियान में  मैं भी पूरी भावनात्मकता के साथ शामिल हूँ ... आप भी आइये !

इंक़लाब जिंदाबाद - जय हिंद !!
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दुष्यंत कुमार जी की एक कविता है ... शायद आपके कुछ काम आये ...

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए 
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जागो सोने वालों ...

4 टिप्‍पणियां:

  1. इस मुहीम में तो हर भारतीय को साथ देना चाहिए ...

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  2. बिल्कुल ठीक बात है शिवम भाई , और अब जबकि खुलेआम ये बिगुल फ़ूंका दिया गया है तो फ़िर सबको अपने अपने स्तर से कोशिश करनी होगी और वो प्रहार इतना भयंकर होना चाहिए कि ..सब कुछ उस आंधी में उड जाए ..आम आदमी को अपनी ताकत दिखानी ही होगी

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

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