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मंगलवार, 29 जून 2010

अब क्या करोगे, राज भाई ??

Posted by at 1:22 pm

महाराष्ट्र नव निर्माण सेना [मनसे] के प्रमुख राज ठाकरे उत्तर भारतीयों से मराठी सीखने को कहते हैं, जबकि उनका बेटा अमित मास मीडिया कोर्स अंग्रेजी में करने की तैयारी में है। वह भी तब, जबकि यह कोर्स मराठी में भी उपलब्ध है।

ठाकरे अपने करीब 50 पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ गुरुवार को अमित का एडमीशन बैचलर ऑफ मास मीडिया [बीएमएम] के अंग्रेजी माध्यम में कराने के लिए माटुंगा स्थित रुइया कॉलेज पहुंचे थे।

सूत्रों के मुताबिक, 'मराठी को उसका हक दिलाने की बात करने वाले ठाकरे अपने बेटे के साथ सीधे प्रिंसिपल के केबिन में पहुंचे। वह अपने बेटे का एडमीशिन अंग्रेजी माध्यम में चाहते हैं।

उन्होंने बीएमएम में पढ़ाए जाने वाले विषयों के बारे में भी पूछा।' ठाकरे के कॉलेज आने की पुष्टि प्रिंसिपल सुहास पड़नेकर ने भी की। उन्होंने इस सत्र से बीएमएम कोर्स मराठी में शुरू किए जाने की भी बात कही।

ठाकरे की पत्नी शर्मिला का कहना है, 'वे कई कॉलेजों में एडमीशन के लिए जा रहे हैं। लेकिन अमित बीएमएम किस भाषा में पढ़ेगा इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।' इस बीच मनसे के प्रवक्ता ने कहा ठाकरे रुइया कॉलेज एक पिता की हैसियत से गए थे, राजनेता की तरह नहीं |

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हम तो कहीं के नहीं रहे ..................... अब क्या कहेगे "मराठी मानुष" से ? कैसे रोकेगे उत्तर भारतीय लोगो को महाराष्ट्र में आने से और हिंदी में बोलने से ?

"घर को आग लग गयी घर के चिराग से..............."

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देख लिया राज भाई ............हो गए ना आप भी मजबूर ?? भाषा कोई भी बुरी या भली नहीं होती ! धर्मं कोई भी बुरा या भला नहीं होता ! यह तो हमारी सोच का खेल है जो कभी कभी भली चीजो को भी बुरा बना देती है और बुरी को भली ! सो अपनी सोच को बदलो और जागो ..............!!

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जागो सोने वालों ...

शनिवार, 26 जून 2010

भाई साहब गिफ्ट पसंद आया ?

Posted by at 9:11 am
और क्या हाल है ...........सब मस्त .............अरे..... वह गिफ्ट पसंद आया है नहीं ??


क्या कहा .................कौन सा गिफ्ट !!??

अरे वही जो आज मिला है ................

नहीं समझे ...........

हद करते हो आप भी ...............

आज कौन सा दिन है ........??

नहीं याद ..............कोई बात नहीं ............मैं हूँ ना ............अभी बताता हूँ !

आज से ठीक ३५ साल पहले तब की 'सरकार' ने देश भर में इमरजेंसी लगाई थी और आज के दिन अब की 'सरकार' ने उस इमरजेंसी की वर्षगाँठ पर जनता के बजट पर इमरजेंसी लगाई है या यह कहे कि जनता को एक 'महँगा' गिफ्ट दिया है |

तो क्या मैं गलत पूछ रहा हूँ कि गिफ्ट पसंद आया या नहीं !! नहीं ना |
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यह तो शायद सरकार भी नहीं जानती कि वह कर क्या रही है और हो क्या रहा है ?

"कांग्रेस का हाथ जनता के साथ" या यह कहे कि यह हाथ जनता के गाल पर पड़ता है हर बार |

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जागो सोने वालों................

रविवार, 20 जून 2010

पापा हार गए…

Posted by at 2:24 am

पापा हार गए…



रात-ठण्ड की


बिस्तर पर


पड़ी रजाईयों को अखाडा बनाता


मेरा छोटा बेटा पांच बरस का |


अक्सर कहता है -


पापा ! ढिशुम-ढिशुम खेले ?


और उसकी नन्ही मुठ्ठियों के वार से मै गिर पड़ता हूँ … धडाम


वह खिलखिला कर खुश हो कर कहता है .... ओ पापा हार गए |


तब मुझे


बेटे से हारने का सुख महसूस होता है |


आज, मेरा वो बेटा जवान हो कर ,


ऑफिस से लौटता है, फिर


बहू की शिकायत पर, मुझे फटकारता है


मुझ पर खीजता है,


तब मै विवश हो कर मौन हो जाता हूँ


अब मै बेटे से हारने का सुख नहीं,


जीवन से हारने का दुःख अनुभूत करता हूँ


सच तो ये है कि


मै हर एक झिडकी पर तिल तिल मरता हूँ |


बेटा फिर भी जीत जाता है,


समय अपना गीत गाता है …


मुन्ना बड़ा प्यारा, आँखों का दुलारा


कोई कहे चाँद कोई आँखों का तारा


- स्व। ओम व्यास ‘ओम’

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आज के दिन आइये एक संकल्प लें कि हमारे रहते कभी पापा को यह नहीं कहना पड़ेगा कि................. "मैं हार गया !"

आप सभी को पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎँ !!

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जागो सोने वालों ...

मंगलवार, 8 जून 2010

जब हम चले तो हिंदुस्तान चले..................

Posted by at 3:58 pm




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आइये एक बार................ सिर्फ़ एक बार ............मिल कर चलने की कोशिश तो करें !!
हम कर सकते है ...........................बस हम कोशिश नहीं करते...................क्यों कि हम सब एक अजीब तरह की नींद में है ...................आइये फिर से जाग जाए |

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जागो सोने वालों...............

शुक्रवार, 4 जून 2010

यह कैसा आविष्कार - क्या हम सही रास्ते जा रहे है ?

Posted by at 12:56 am
इंसान ने शुरुआत से ही विज्ञानं को अपना साथी बनाया हुआ है ............उसने अपनी हर जरूरत के मुताबिक अपने इसी साथी की मदद से अपने लिए ऐसी ऐसी खोजे करी कि आज वह अपनी धरती को छोड़ चाँद तक पर बसने के सपने सजा रहा है ! इन सब उपलब्धियों को देखे तो लगता है कि इंसान का सब से वफादार साथी विज्ञान ही है |

पर इंसान तो साहब इंसान ठहरा ............जब तक कुछ गलत ना करें अपनी इंसानियत को कैसे साबित करें |

तो लग गए जनाब विज्ञान का पूरा इस्तमाल करने में कुछ ऐसे अविष्कारों के लिए जो अगर ना भी हुए होते तो काम चल जाता .........................जैसे कि परमाणु बम |
वैसे अभी कुछ दिन पहले एक लेख पढ़ था जिस में इंसान के इस वफादार साथी का एक और कारनामा छपा था| आजतक यही सोच रहा हूँ क्या इस आविष्कार कि सच में कोई जरूरत थी ??

यहाँ उस लेख का लिंक दे रहा हूँ ताकि आप सब भी उसको पढ़े और अपनी राय दे !

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जरूरत है हम सब को इस नींद से जागने की कि हम विज्ञानं का सदुपयोग कर रहे है | कुछ आविष्कार हितकारी नहीं होते यह भी समझना होगा | इंसान एक सामाजिक प्राणी है .........और समाज में बहुत सी ऐसी रीतियाँ है जो पुरानी और बचकानी लग सकती है पर जिन के होने की वजह से ही समाज में एक स्थिरता है | यह स्थिरता बनी रहे उस में ही हम सब की भलाई है !
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वैसे हम को क्या पर क्या करें आदत जो है सो कह रहे है .............................जागो सोने वालों ......
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