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सोमवार, 23 नवंबर 2009

माल हमारा, ऐश करे पाक !!

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बेलगाम मंहगाई ने देशवासियों का दम निकाल दिया है। सरकार इस पर काबू पाने में असमर्थ नजर आ रही है। देश में खाद्य पदार्थो की भारी किल्लत है। लाख कोशिशों के बावजूद मंहगाई से त्रस्त लोगों को राहत का रास्ता नहीं सूझ रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान को टमाटर, लहसून समेत कई चीजें आधे दामों पर निर्यात किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय करार के तहत ऐसा करना हमारी मजबूरी है।

भारतीयों को 60 रुपये प्रति किलो [फुटकर] मिलने वाला टमाटर पाकिस्तान को 17 रुपये प्रति किलो की दर से निर्यात किया जा रहा है। इसी तरह देश में लहसुन के लिए सौ रुपये प्रति किलो [फुटकर] अदा करने पड़ते हैं, वहीं पाकिस्तानियों को यही लहसुन महज 35 रुपये किलो ग्राम के हिसाब से भेजा जा रहा है।

इस बीच पाकिस्तान ने फिर भारत से आलू की मांग की है। पाकिस्तान स्थित पेप्सी कंपनी ने 700 टन आलू मांगा है। रविवार को आलू की पहली खेप भेजी गई है।

भारतीय व्यापारी अनिल मेहरा ने बताया कि पाक स्थित पेप्सी कंपनी ने फिर 700 टन आलू मंगवाया है। इसके लिए दो दिन पहले ही उनकी फर्म के साथ करार हुआ है। जबकि पाकिस्तान टमाटर भी फिर से मांग रहा है। टमाटर व लहसुन भारत में मंहगा होने के बावजूद क्यों भेजा जा रहा है। इस सवाल पर मेहरा कहते हैं कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार की मजबूरी है। जो सौदा पहले हो जाता है, उसे उसी समय के रेट में भेजना पड़ता है। भारत की मंडी में तेजी चल रही है। इसके बावजूद करार तोड़ा नहीं जा सकता। इसलिए मुनाफे के चक्कर में घाटा भी उठाना पड़ता है।

रविवार को अटारी सड़क सीमा के रास्ते तीन ट्रक आलू, पांच ट्रक सोयाबीन, दो ट्रक लहसुन, एक ट्रक टमाटर, दो ट्रक हरी मिर्च पाकिस्तान भेजी गई।

अमृतसर चेंबर आफ कार्मस के महासचिव राजेश सेतिया कहते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर होता है। डालर के हिसाब से सारा कारोबार होता है। ऐसे में पहले से करार होने के चलते दाम कम-ज्यादा होने के बावजूद वहाँ भेजना या मंगवाना तो पड़ता ही है

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यह समझ नहीं आता कि कैसे भारत ने हर उस समझोते पर अपनी मोहर लगाई है जिस में पाकिस्तान का फायेदा है ?? एक तरफ़ अपने देश की जनता है जो अपनी दाल - रोटी भी बड़ी मुश्किल से चला पा रही है दूसरी और पाकिस्तान की जनता है जो हमारे देश का खा खा कर हमको ही आँखे दिखाती है ! वैसे अपनी सरकार भी मजबूर है सस्ते में माल दें तो क्या करे ..........?? माल देने की सूरत में वह लोग खाने यहाँ जाते है अपने साथीयों के साथ...........और ऊपर से नखरे इतने कि साहब खायेगे तो 'ताज' या 'ट्रिडेंट' में ही खायेगे कहीं और नहीं और वह भी ज़ोर ज़बरदस्ती से !!

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ठीक है जी मान लो आप उनकी बात .............पर कम से कम हम लोगो को भी कुछ खाने दो ..........कुछ हम को भी सस्ता दिलवा दो ............मान भी जाओ........हमारी तरफ़ कब तक मुंह कर के सोते रहोगे ..................जागो सोने वालों .....................


9 टिप्‍पणियां:

  1. दाने-दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम ! एक पुराणी कहावत है की मूरख लोग घर बनाते है और समझदार लोग उसमे आकार रहते है !

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  2. पाकिस्तान से सस्ते में माल चाहिये तो एके-47, हथगोले, कारतूस आदि मंगवा लें? अपने बिहार से भी सस्ता मिलेगा…

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  3. हां करार की बाध्यता ऐसी ही होती है.

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  4. भाई, आप तथ्यों को ठीक से समझें। भारत से सस्ती दर पाकिस्तान स्थित पेप्सी कंपनी माल खरीद रही है, जो एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है और यह माल कोई सौ दो सौ ट्रक नहीं भेजा गया। हमारी सरकार ने भी वहां से बेहद सस्ती कीमत पर सीमेंट पर चीनी की खरीद की है। दूसरी बात यह कि भारत सरकार ने पाक को मोस्टे फेवर्ड नेशन का दर्जा दे रखा है। इस दर्जे की मांग पाकिस्तान ने नहीं की है, न हमारे हाथ से यह दर्जा छीन लिया है। हमारी सरकार ने स्वेच्छा से दिया है। दूसरी बात कूटनीति सीधे-सीधे नहीं चलती है। इसलिए कृपया चीजों को सपाट ढंग से न समझें।

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  5. पंकज जी,
    हर सिक्के के दो पहेलु होते है ........दूसरा पहेलु आपने दिखाया....आभार !

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  6. आपका आलेख अच्छा है ........ और ये भी सच है ......... अंतर्राष्ट्रीय व्योपार ऐसे ही चलता है .....

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  7. अमेरीका ने कह दिया है कि वो ऐश कर सकते है...आप काहे परेशान हैं..कौन सुनेगा!!

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  8. Aam janta is baat se bilkul hi anbhigya hai.....sachet karne aur jankari dene ke liye bahut bahut aabhar....

    Kya kaha jaay....ham to chupchaap yah sab dekhne ko badhya hain....par isi tarah aawaaj to utha hi sakte hain....

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