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शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

अंधेरे में रहेगा शहीदों का आंगन

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दिवाली पर सारा देश जगमगाएगा, लेकिन राष्ट्रीय स्मारक जलियांवाला बाग अंधेरे में डूबा रहेगा। 90 साल पहले जिन परवानों ने देश के लिए शहादत दी, उनके नाम को आजतक सरकार रोशन नहीं कर पाई।
बची-खुची कसर शहीदों के परिजनों ने पूरी कर दी। अपने पूर्वजों के नाम पर उन्हें सरकार से मदद की तो भरपूर आस है, लेकिन देश की आजादी के लिए जहां दादा-नाना ने खून बहाया, उस पावन धरती पर श्रद्धा के दो दीप तक जलाने के लिए शहीदों के परिजनों ने कभी कोई प्रयास नहीं किया।
जी हां, दिवाली के मौके पर रोशनी से हर-घर आंगन जगमगाएगा, लेकिन शहीदी स्थल जलियांवाला बाग में शहादत देने वालों की याद में कोई भी शख्स वहां श्रद्धा के दो दीपक नहीं जलाता। सरकार भी अपने स्तर पर यहां दीपमाला के लिए कोई प्रयास नहीं करती। पर उस सरकार से भला हम यह आस भी कैसे करें जो आज तक जलियांवाला बाग के शहीदों के नाम को उजागर तक नहीं कर पाई। हैरानी की बात यह है कि जलियांवाला बाग कांड के 90 वर्ष बाद सरकार ने शहीदों की सूची लगाने का निर्णय लिया था।
काफी शोर-शराबे के बाद शिलापंट्ट तो बनकर तैयार है, लेकिन सूची अभी तक इससे नदारद है। शहीदों के परिजन तो सरकार से भी दो कदम आगे निकले। शहीद के परिजन पूर्वजों के शहादत को भुनाने के तिकड़म में अभी तक जुटे हैं। वह सरकार से ढेर सारी सुविधाएं पाने की जुगत में हैं। दिवाली पर उनके घर तो जगमगाते हैं, लेकिन पूर्वजों ने जिस पावन धरती पर देश के लिए शहादत दी वहां श्रद्धा के दो दीपक जलाना मुनासिब नहीं समझते। यही बस नहीं शहीदों को सरमाया बताने वाले और राष्ट्रीयता का दंभ भरने वालों की भी कमी नहीं है, लेकिन वह भी शहीदी स्थल में कभी दिए जलाने नहीं पहुंचे।
जलियांवाला बाग की जगमगाहट पर नजर डालें तो यहां शाम ढलने के बाद उजाले के नाम पर मद्धिम रोशनी ही जलती है। लिहाजा शाम ढलते ही शहीदी स्थल से प्रकाश गायब हो जाता है। सरकार ने लाइट एंड साउंड प्रोग्राम के माध्यम से शहीदी स्थल की छटा को निखारने का निर्णय लिया है, लेकिन इसमें अभी वक्त लगेगा। वैसे बता दें कि जलियांवाला बाग में बिजली की सप्लाई का खर्च निगम वहन कर रहा है। लाइट एंड साउंड प्रोग्राम के लिए यहां पर निर्बाध तौर पर बिजली सप्लाई के लिए बिजली बोर्ड ने अलग से ट्रांसफार्मर भी लगवाए हैं। केंद्र सरकार द्वारा शहीदी स्थल के लिए 5 करोड़ की लागत से किए जा रहे विकास कार्य के तहत शहीदी लाट, शहीदी कुआं, समाधि, दीवारें व पाथ पर नए लाइटे लगाई गई हैं, लेकिन क्या कृत्रिम प्रकाश शहीदों की आत्मा को रोशन कर पाएगा?
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आज सिर्फ़ यह कह कर काम नहीं चल सकता कि ............जागो सोने वालो  .......... इस लिए साथ साथ यह भी कहेता हूँ कि ..... ज़रा याद उन्हें भी कर लो .........

9 टिप्‍पणियां:

  1. अब क्या करेगे मिशा जी सरकार तो अपना मकान जगमगाने में लगा है

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  2. अजी मिश्रा जी, आप जलियांवाला बाग में जान देने वालों को शहीद कह रहे हैं? अजी, शहीद तो सिर्फ कुछ गिने चुने लोग हैं जिन्होंने बिना किसी हिंसा के हमें आजादी दिलवाई थी। :-(

    और फिर लाइट एंड साउंड प्रोग्राम से तो आमदनी होगी। दिवाली में रोशनी करने से क्या मिलने वाला है?

    दीपावली के दिन उदास करने वाली बात की है आपने फिर भी ...

    दीपोत्सव का यह पावन पर्व आपके जीवन को धन-धान्य-सुख-समृद्धि से परिपूर्ण करे!

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  3. एक शहीद के आख़िरी शब्द :
    उजाले अपनी यादो के मेरे साथ रहने दो,
    न जाने किस गली में जिन्दगी की आख़िरी शाम हो जाए !

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  4. बड़ा ही अनछुआ विषय उठा है शिवम जी आपने..मन कुछ अजीब सा हो गया...एक शेर लिखा था कभी
    "अब शहीदों की चिताओं पर न मेले सजते हैं
    इतनी भी फुरसत कहाँ है लोगों को घर-बार से"

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  5. अपने हुए पराये । स्वार्थ के अंधी दौड में भावनाओं को तिलांजली दे चुके हैं है हम ।

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  6. यदि आप क्रांतिकारियों के बारे में अनूठी जानकारी चाहते है, तो प्लीज मेरे ब्लॉग पर आईये ''hindustan shahido ka'' or www.anilverma.in

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  7. I am judge by profession, but i am writer also,my 1090 articles on various sports & 5 books hasbeen published ,I have written very rare research like books on Indian Revolutionaries Batukeshwar Dutt, Rajguru & Chandrasekhar Aazad. my grandfather Sri Motilal Verma was a famous freedom fighter , he worked & was asociated with Great Patriot Chandrasekhar Aazad, Dr. Rajendra Prasad & Mahatatma Gandhi I have started a website & blog on Indian revolutionaries & other freedom fighters, named " Hindusatan Shahido ka'', every Indian should be aware with Indian freedom history, please visit my blog'' www.anilverma.in

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