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शनिवार, 12 सितंबर 2009

क्या बेटा और क्या बेटी ?

Posted by at 12:26 pm Read our previous post
बेटा ही देगा बाप को मुखाग्नि और करेगा पिंडदान, इस मिथक को यहाँ बिहार विवि से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही युवती अनुभूति उर्फ छोटी ने तोड़ दिया है। शुक्रवार को उसके पिता की बारहवीं [द्वादशा] थी और इस दौरान मिठनपुरा स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में वह बेटे का फर्ज निभाते हुए श्राद्ध की सारी रस्में निभा रही थी। मौजूद लोगों की आंखें नम थीं और लड़की के प्रति आदर के साथ सहानुभूति का भाव भी।
पिता के श्राद्ध पर बेटी के पिंडदान करने की खबर जंगल की आग की तरह शहर में फैली और इस घटना को देखने मात्र के लिए वहाँ हुजूम उमड़ पड़ा। उधर, गुमसुम छोटी अपने पिता की आत्मा की शांति  के लिए घटों बेदी पर रस्म निभाने में मशगूल थी। पंडित मंत्रोच्चार करते रहे। छोटी की माँ उमा तिवारी, जो स्थानीय महंथ दर्शन दास महिला महाविद्यालय में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं ने बताया कि क्या बेटा और क्या बेटी? छोटी ने तो सब बराबर कर दिया। शोकाकुल उमा ने बताया कि उनके पास दो बेटिया ही हैं-ईप्सिता और छोटी। आज पिता का अंतिम संस्कार कर छोटी ने बेटे का फर्ज निभा दिया।
उधर, श्राद्धकर्म करा रहे आचार्य पं.धनश्याम उपाध्याय तथा पुरोहित भोला मिश्र ने बताया कि शास्त्र के अनुसार पुत्र के अभाव में पत्नी, पत्नी के अभाव में सहोदर, सहोदर के अभाव में बंधु, बंधु के अभाव में राजा और राजा के अभाव में पुरोहित श्राद्धकर्म कर सकता है। शास्त्र के अनुसार पुत्र की जगह पुत्री ने उत्तम लोक की प्राप्ति के लिए पिता का श्राद्ध कर्म किया, यह उत्तम बात है। उन्होंने ही बताया कि बारह दिनों पहले लंबी बीमारी से पिता राकेश तिवारी की मौत के बाद उन्हें छोटी ने मुखाग्नि भी दी थी।
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छोटी ने तो अपना फ़र्ज़ निभा दिया, अब बारी समाज की है !!  देखते है वो कब नींद से जागता है ?? 
खैर, साहब जागे ना जागे, हम तो कहेते रहेगे ...... जागो सोने वालों ...... 
 

5 टिप्‍पणियां:

  1. इस तरह से कई जगह लड़कियाँ अब ये काम कर रही हैं। जोकि सही भी है। समाज के हरेक काम में बराबरी होना चाहिए। मेरे परिवार में ही मेरी बुआ दादी और बाबा दोनों का क श्राद्ध पूरी विधि से करती हैं। कई बार उन्हें परिवारवालों ने टोका लेकिन, वो इस काम के लिए अडिग हैं।

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  2. aise hi badlega samaaj
    aise hi tootengi bediyan

    bahut achhi post

    shubh kaamnaayen

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  3. इस तरह के समाचार पहले भी सुने हैं. दीप्ती जी की टिपण्णी भी कुछ ऐसा ही कहती है.छोटी ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो अनुकरणीय है. यह घटना हिन्दू धर्म के लचीले और जीवंत होने का प्रमाण भी है.

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  4. हमें हमारे लिए ही जागना तो पडेगा...!
    जारी रहें.

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    क्या आप [उल्टा तीर] के लेखक/लेखिका बनाना चाहेंगे/चाहेंगी- विजिट- http://ultateer.blogspot.com/ होने वाली एक क्रान्ति.

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  5. इस पोस्ट के लिए अशेष धन्यवाद शिवम. लोगों के विचारों में धीरे धीरे ही सही पर परिवर्तन आ अवश्य रहा है. आप इसी तरह अच्छी खबरों को हाईलाइट करते रहें, मेहनत रंग ज़रूर लाएगी.

    शुभेच्छा एवं स्नेहाशीष.

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आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

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